



ख़ूबसूरत
कुदरत ने सनम तुमको क्या शोक अदा दी हैं
julphon मैं दिए जादू आंखों मैं हया दी हैं
आलम हैं जवानी का उस पर ये नज़र कातिल
रहो मैं तडपता हूं जरा देख ले सघ दिल
आसिक को सनम अपने ये कैसी सजा दी हैं
कुदरत ने सनम तुमको क्या शोक अदा दी हैं
फूल सितारों से तेरी मांग सजा दोंगा
तेरी चद्ती जवानी का मैं सजदा उतारूंगा
ओह आशिक को सनम अपने ये कैसे सजा दी हैं
कुदरत ने सनम तुमको क्या शोक अदा दी हैं
तू जान मेरी बन जा दुनिया से छुपा दूंगा
मौसम के मेरे हम दम दोनों को दुआ दी हैं
कुदरत ने सनम तुमको क्या शोक अदा दी हैं
हर रिश्ताएक एहसास है ज़िन्दगी काइसलिये संभाले रखनाखुदा का ये खूबसूरत तोहफाजो मिल जाता है आसानी सेलेकिन जिसे संभालना बेहद मुश्किल है......रिश्ता जब गहराने लगेतो संभालनाज़्यादा ज़रूरी हो जाता है..........इस मोड़ परज़्यादा बेफिक्री अच्छी नहीं होतीहै ना......
aisabasera
aisabasera आंखें बचा के कलियाँ मैंने गुलशन को कई बार संवरते देखाहर तरफ रंग का खुशबू का समा होता हैपंछियों की चहक सरगम का मज़ा देती हैचांदनी टूट के गुलशन में बिखर जाती हैधूप पत्तों को उजालों से सजा देती हैकोई अल्हड़ कोई मदमस्त हवा का झोंकाशोख़ कलियों का बदन छू के निकल जाता हैइस शरारत से भी कलियों को मज़ा आता चटक जाती हैंफूल खिलते हैं तो गुलशन में बहार आती हैपर ये रंगीन फ़ज़ा और ये गुलशन की बहारवक़्त के साथ वीराने में बदल जाती हैधूप की तल्खी चुराती है रंग फूलों काआंधियां नूर की महफ़िल को फ़ना करती हैंपत्तियाँ सूख के तिनकों की शक्ल लेती हैंसूखे तिनके किसी का घोंसला बन जाते हैंचांदनी टूट के रोती है इस तबाही कोकोई हलचल यहाँ दिखाई ही नहीं देतीअब इसे देखने कोई यहाँ नहीं आताअब ये गुलशन यूँ ही वीरान पड़ा रहता है
aisabasera आंखें बचा के कलियाँ मैंने गुलशन को कई बार संवरते देखाहर तरफ रंग का खुशबू का समा होता हैपंछियों की चहक सरगम का मज़ा देती हैचांदनी टूट के गुलशन में बिखर जाती हैधूप पत्तों को उजालों से सजा देती हैकोई अल्हड़ कोई मदमस्त हवा का झोंकाशोख़ कलियों का बदन छू के निकल जाता हैइस शरारत से भी कलियों को मज़ा आता चटक जाती हैंफूल खिलते हैं तो गुलशन में बहार आती हैपर ये रंगीन फ़ज़ा और ये गुलशन की बहारवक़्त के साथ वीराने में बदल जाती हैधूप की तल्खी चुराती है रंग फूलों काआंधियां नूर की महफ़िल को फ़ना करती हैंपत्तियाँ सूख के तिनकों की शक्ल लेती हैंसूखे तिनके किसी का घोंसला बन जाते हैंचांदनी टूट के रोती है इस तबाही कोकोई हलचल यहाँ दिखाई ही नहीं देतीअब इसे देखने कोई यहाँ नहीं आताअब ये गुलशन यूँ ही वीरान पड़ा रहता है

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